राव नराजी के वंशज नरावत राठौङ या नरावत जोधा राठौङ कहलाए।
राव नरा -राव जोधा जी के पौत्र तथा राव सुजा जी की सन्तान (पुत्र) है।
मारवाड़ नरेश राव सातलती के कोई सन्तान नही होने के कारण अपने छोटे भाई राव सुजा जी के पुत्र राव नरा जी को गोद ले लीया ।
1490 जब मिरमोहमद घुङले नामक मुगल सरदार ने 200 से अधिक गणगोर की तीजणीयो का अपहरण कीया।ये खबर जब राव सातल को पता लगी तो उन्होंने तत्काल मुगल सेना पर धावा बोल दिया।
जिसमे मिरमोहमद घुङले मारा गया तथा उसका कटा सर मारवाड़ मे फेरा ( घुमाया) गया।
तथा उस युद्ध मे राव सातल वीरगति को पर्याप्त हुए ।
जब नराजी का राज्य अभिषेक होने लगा तब राव सुजा जी तथा रानी सारंगदे के कहे अनुसार राव नराजी ने मारवाड़ की गादी इनायात की।
तथा तत्काल मारवाड़ छोङकर रवाना हो दिए।
जिससे नराजी के छोटे भाई उदाजी ने भी मारवाड़ का त्याग कर दिया।
राव नराजी पश्चिम की तरफ चले जिसमे राव के साथ कुछ लोग व जातियां भी थी।राव जब जागंलुप्रदेश या बीकानेर की रियासत के पाटण नगरी पास की विजया नामक प्राचीन नगरी जो की आज फलौदी के नाम से जानी जाती है।
वही किले की नींव दी किन्तु किले का निर्माण पुर्ण नही होने पर राव नराजी ने जम्भेश्वर (विश्नोई समाज के संस्थापक) से मदद ली किले का निर्माण कार्य आगे बढा।
इसी बात से नाराज बीकानेर ने कई हमले भी किए।
कुछ समय बाद जब राव नराजी को पोकरणो द्वारा राव सातल की महारानी के अपमान की बात पता लगी। जो महारानी (गोद के पुत्र)राव नराजी के साथ फलोदी मे रहते थे। तब राव नराजी ने सेवा वंश के अपने राज पुरोहित के मदद से खिवमल पोकरणा से पोकरण को ले लीया तथा पोकरण के किले पर अधिकार कर लिया।
पोकरण से कुछ दूरी पर राव नराजी ने सातलमेर दुर्ग तथा गांव बसाया।
राव नरा जी के बाद उनके पुत्र ने राज्य को दो भागों बाट लिया जिसमे जेष्ठ पुत्र राव गोविन्ददास जी ने पोकरण तथा राव हम्मीरदास जी को फलोदी राज्य दिया।
दोनों ही स्वतंत्रता राज्य चलाने लगे।
राव नराजी की जयंती पर कोटि कोटि प्रणाम
नरावत राठौङ के कई भोम व ठिकाने है
जैसे-
झलारिया नरावतान
खारा
भङाणो
बासुरी
बुहू
कसूबी
बधणसर
वागरासर
बामणू
तेना
उमादेसर
नागौर
जालोर
रिदवा
सुजासर
एका
रामदेवरा
मोहनगढ़ जैसलमेर
कुवर जालम सिंह राठौड़
झलारिया नरावतान